The Taj Story Review in Hindi : क्या ताजमहल की असली कहानी सामने आई या सिर्फ एक और बहस?

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जानिए The Taj Story Review in Hindi का ईमानदार रिव्यू – Paresh Rawal की शानदार एक्टिंग, कोर्टरूम ड्रामा और इतिहास पर उठाए गए विवादित सवालों के बीच यह फिल्म आखिर कहां टिकती है? पढ़ें पूरा ‘The Taj Story ‘

The Taj Story Review: जब इतिहास बन गया कोर्ट केस

The Taj Story” एक ऐसी फिल्म है जो भारतीय इतिहास की सबसे मशहूर निशानी — ताजमहल — को लेकर एक नया नज़रिया पेश करने की कोशिश करती है।डायरेक्टर तुषार अमरीश गोयल ने इस फिल्म को एक कोर्टरूम ड्रामा के रूप में पेश किया है, जहाँ सवाल है – क्या शाहजहां ने सच में ताजमहल बनवाया था या यह पहले से मौजूद किसी राजा का महल था? फिल्म में Paresh Rawal ने विष्णु दास का किरदार निभाया है — एक सीनियर टूर गाइड जो 30 सालों से ताजमहल की कहानी सुनाता आ रहा है, लेकिन एक दिन उसका खुद का विश्वास हिल जाता है।

The Taj Story Review कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है आगरा के एक अनुभवी गाइड विष्णु दास से, जो दशकों से ताजमहल के बारे में टूरिस्ट्स को जानकारी देता आ रहा है। एक इंटरव्यू के दौरान जब एक पत्रकार उससे ताजमहल के इतिहास पर सवाल करता है, तो वह चुप रह जाता है।


बाद में, नशे की हालत में अपने दोस्तों से कहता है कि जो कहानी वह पर्यटकों को सुनाता है — “वो सब पूरी तरह सच नहीं है। ये बात किसी ने वीडियो में कैद कर ली और इंटरनेट पर वायरल कर दी। नतीजा — विष्णु को नौकरी से सस्पेंड कर दिया जाता है, समाज उसे झूठा मान लेता है, और उसका बेटा अविनाश (Namit Das) भी इस बदनामी का सामना करता है।

अपनी खोई हुई इज़्ज़त वापस पाने के लिए विष्णु तय करता है कि वह कानूनी रास्ते से सच्चाई साबित करेगा। वह कोर्ट में एक PIL (Public Interest Litigation) फाइल करता है — ताकि ये साबित कर सके कि ताजमहल वास्तव में राजा जय सिंह का महल था, जिसे बाद में शाहजहां ने अधिग्रहित किया था।

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Review: The Taj Story Review in Hindi

फिल्म का पहला हाफ काफी रोचक है — जब विष्णु दास एक आम आदमी से कोर्ट तक पहुंचता है, अपने सिद्धांत के लिए लड़ता है। लेकिन दूसरा हाफ धीरे-धीरे बहुत लंबा और थकाऊ महसूस होने लगता है।
लगातार चलती बहसें, इतिहासकारों की गवाही, और अंतहीन कोर्टरूम सीन कहानी की गति को रोक देते हैं।फिल्म की शुरुआत में जो उत्सुकता होती है, वह धीरे-धीरे एक दोहराव भरी बहस में बदल जाती है।हर नई दलील पहले वाली जैसी लगती है — कोई ताज की “22 सील बंद कमरों” की बात करता है, कोई “वास्तविक इतिहास” का हवाला देता है, लेकिन अंत में नतीजा वही रहता है: बहस जारी है, सच्चाई धुंधली है।

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Paresh Rawal: फिल्म की जान

अगर फिल्म The Taj Story Review in Hindi देखने लायक है तो सिर्फ और सिर्फ Paresh Rawal की वजह से। उन्होंने विष्णु दास के किरदार में जो sincerity और humor भरा है, वह कहानी में जान डाल देता है।उनके एक्सप्रेशन्स, छोटी-छोटी हरकतें और डायलॉग डिलीवरी फिल्म की कमजोर स्क्रिप्ट को संभाले रखती है।उनका किरदार एक ऐसे आदमी का है जो समाज के तानों से टूटा हुआ है लेकिन सच की तलाश में अडिग खड़ा है।
एक सीन में जब वे कहते हैं —“मैं गाइड हूं, लेकिन मुझे खुद अपनी कहानी की सच्चाई नहीं पता।” तो थिएटर में सन्नाटा छा जाता है।

Zakir Hussain और बाकी कलाकारों की परफॉर्मेंस

Zakir Hussain ने विपक्षी वकील अनवर राशिद का रोल निभाया है — और वह हर सीन में अपने आत्मविश्वास से प्रभावित करते हैं।उनके संवाद सटीक हैं और कोर्टरूम में उनका स्क्रीन प्रेज़ेंस दमदार है। Namit Das और Amruta Khanvilkar अपने किरदारों में ईमानदार हैं, मगर स्क्रिप्ट उन्हें ज्यादा मौका नहीं देती। फिल्म की लेखन शैली इतनी डायलॉग-हेवी है कि इमोशन्स कई बार पीछे छूट जाते हैं।

Screenplay और Direction: विचार अच्छा, निष्पादन कमजोर

तुषार अमरीश गोयल का इरादा साफ है — वे एक intellectual debate दिखाना चाहते थे, लेकिन फिल्म बीच में जाकर conspiracy theories का कोलाज बन जाती है। 22 बंद कमरों का जिक्र, इतिहासकारों पर सवाल, और “लेफ्टिस्ट एजेंडा” जैसे डायलॉग्स फिल्म को ज़रूरत से ज्यादा राजनीतिक बना देते हैं। कई बार ऐसा लगता है जैसे फिल्म विचारों की जगह बहस में फंस गई है। कहानी आगे बढ़ने के बजाय बार-बार गोल घूमती है — और दर्शक धीरे-धीरे कनेक्शन खो देता है।

Cinematography और Background Score

फिल्म The Taj Story Review in Hindi के लोकेशन्स (Agra, Courtroom, और Local Streets) रियल लगते हैं।कैमरा वर्क साधारण लेकिन क्लीन है — कुछ सिन्स में Taj Mahal का aerial view खूबसूरत लगता है।Background Score सीरियस टोन को सपोर्ट करता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा डायलॉग्स उसकी ताकत को कम कर देते हैं।

Dialogues: राष्ट्रवाद की तीव्र लहर

फिल्म कई जगहों पर अपने विचारों को बहुत सीधे और तीखे शब्दों में कहती है।
Paresh Rawal के संवाद —“PR न होने की वजह से हमारे कारीगरों का नाम मिटा दिया गया।”“इतिहास नहीं, एजेंडा पढ़ाया गया।”— फिल्म को एक खास विचारधारा की ओर मोड़ देते हैं।हालांकि, अगर इन डायलॉग्स में थोड़ा संतुलन और गहराई होती, तो फिल्म ज्यादा प्रभावशाली बन सकती थी।

संदेश (Message): सवाल अच्छे हैं, जवाब अधूरे

“The Taj Story” एक साहसी विषय पर बनी फिल्म है।
यह दर्शकों से सवाल जरूर पूछती है —

“क्या इतिहास वही है जो हमने किताबों में पढ़ा, या उसके पीछे कुछ और भी है?”
लेकिन जवाब देने के बजाय फिल्म बहसों में उलझ जाती है।

इसका असर ये होता है कि फिल्म का उद्देश्य — सच की तलाश — धीरे-धीरे थकान भरी खोज बन जाती है।

The Taj Story Review in Hindi: Verdict

The Taj Story देखने लायक है अगर आप

  • विचारोत्तेजक फिल्मों में रुचि रखते हैं,
  • और Paresh Rawal के अभिनय के फैन हैं।

लेकिन अगर आप एक टाइट स्क्रिप्ट और प्रभावशाली ड्रामा चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको अधूरा छोड़ सकती है।यह फिल्म The Kerala Story या The Kashmir Files जैसी गंभीरता लाने की कोशिश करती है, लेकिन वहां तक नहीं पहुंचती।

FAQs – The Taj Story Review in Hindi

Q1. The Taj Story फिल्म किसने डायरेक्ट की है?
A. इस फिल्म के लेखक और डायरेक्टर हैं Tushar Amrish Goel

Q2. फिल्म में मुख्य कलाकार कौन हैं?
A. Paresh Rawal, Zakir Hussain, Namit Das, Amruta Khanvilkar इस फिल्म के मुख्य कलाकार हैं।

Q3. The Taj Story किस जॉनर की फिल्म है?
A. यह एक Courtroom Drama फिल्म है जिसमें इतिहास और विचारधारा का मिश्रण है।

Q4. क्या फिल्म ताजमहल के इतिहास को चैलेंज करती है?
A. हाँ, फिल्म में यह दिखाया गया है कि ताजमहल पहले राजा जय सिंह का महल था, जिसे बाद में शाहजहां ने अधिग्रहित किया।

Q5. क्या यह फिल्म फैक्ट्स पर आधारित है?
A. फिल्म कुछ विवादित थ्योरीज़ पर आधारित है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता।

Q6. क्या यह फिल्म बच्चों के लिए उपयुक्त है?
A. यह फिल्म फैमिली ऑडियंस के लिए उपयुक्त है, लेकिन इसकी भाषा और बहसें वयस्कों को ज्यादा अपील करेंगी।

Q7. क्या फिल्म ओवरड्रामैटिक लगती है?
A. हाँ, दूसरे हाफ में फिल्म थोड़ा ओवरड्रामैटिक और दोहराव भरी लगती है।

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