Kis Kisko Pyaar Karoon 2 movie review in hindi पढ़ें—कपिल शर्मा की दिल छू लेने वाली कॉमेडी, धार्मिक-सामाजिक व्यंग्य, मज़ेदार किरदार, भावनात्मक पलों और बेहतरीन संदेश से भरी यह फिल्म कैसी है? यहाँ है पूरी कहानी, रिव्यू, अभिनय ।
Kis Kisko Pyaar Karoon 2 Movie Review in Hindi – कपिल शर्मा की दिल छू लेने वाली
कॉमेडी किंग कपिल शर्मा की फिल्मों का अपना एक अलग रंग है। उनकी कॉमेडी, उनका टाइमिंग, उनका मासूम चेहरा ये सब स्क्रीन पर आते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं। Kis Kisko Pyaar Karoon (2015) उनके फिल्मी करियर की अच्छी शुरुआत थी।
लेकिन इस बार Kis Kisko Pyaar Karoon 2 केवल हंसी-मज़ाक नहीं है यह फिल्म धड़ाधड़ मज़ाक उड़ाने वाली कॉमिक दुनिया से निकलकर एक परिपक्व, प्रोग्रेसिव और दिल को छू लेने वाली कॉमेडी-ड्रामा बन जाती है।
डायरेक्टर अनुकल्प गोस्वामी ने इस बार ऐसा बदलाव दिखाया है कि दर्शकों को कपिल की कॉमेडी के साथ-साथ एक नई संवेदनशीलता का अहसास भी होता है। कहानी भले ही “एक आदमी की तीन शादियाँ” जैसे पुराने फॉर्मूले पर आधारित है, लेकिन इसके अंदर छुपा धर्म, प्यार, सामाजिक भेदभाव और इंसानियत पर गहरा संदेश इसे खास बनाता है।
इस रिव्यू में हम फिल्म की कहानी, अभिनय, निर्देशन, मज़ेदार पल, भावनात्मक परतों और सामाजिक संदेश को लंबे, प्रवाहमय पैराग्राफ़ में विस्तार से समझेंगे।
फिल्म की कहानी
फिल्म की शुरुआत मोहन शर्मा (कपिल शर्मा) और सानिया हुसैन (हीरा वरीना) के प्यार से होती है। दोनों एक-दूसरे से दिल से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं, लेकिन एक बड़ी रुकावट आ जाती है धर्म। दोनों के परिवार इस रिश्ते के खिलाफ हैं, और यही वह जगह है जहाँ से कहानी बेहद रोचक हो जाती है।
मोहब्बत पाने के लिए मोहन एक ऐसा रास्ता चुनता है जिसे कोई आम इंसान शायद सोच भी न पाए। सानिया के साथ रहने के लिए वह पहले इस्लाम धर्म स्वीकार करने का फैसला करता है और बन जाता है महमूद। लेकिन गलतफहमी ऐसी होती है कि सानिया की जगह उसकी बहन रूही (आयशा खान) उससे शादी कर बैठती है।
यहाँ से शुरू होता है वह कॉमिक रोलर-कोस्टर जो कपिल शर्मा के सिग्नेचर अंदाज़ को एक नए अंदाज़ में पेश करता है। मोहन घर लौटता है तो उसके माता-पिता उसे जबरन एक दूसरी लड़की मीरा (त्रिधा चौधरी) से शादी करा देते हैं। अब मोहन एक ही समय में दो पत्नियों का पति बन चुका है एक अनजाने में, दूसरी मजबूरी में।
इधर सानिया उसे बताती है कि वह भी प्यार के लिए खुद को बदलने को तैयार है। वह ईसाई धर्म अपनाकर Jenny बन जाती है और चाहती है कि मोहन भी Michael बनकर उससे चर्च में शादी करे। मोहब्बत में पागल मोहन यह भी कर देता है, लेकिन इस बार भी गलतफहमी उसे एक तीसरी दुल्हन जेनी (पारुल गुलाटी) के साथ शादी के मंडप में पहुँचा देती है।
अब स्थिति ऐसी हो जाती है:
- मोहन → मीरा का पति
- महमूद → रूही का पति
- माइकल → जेनी का पति
एक आदमी तीन धर्म तीन शादियाँ और सभी को खुश रखने की कोशिश में मोहन रसोई, रिश्ते, झूठ और भागदौड़ के बीच जिंदगी को सँभालता हुआ एक करैक्टर बन जाता है।
यहाँ से फिल्म में कॉमेडी का बवंडर आता है, लेकिन इस बार कॉमेडी सिर्फ हँसाती नहीं है it teaches with a smile.
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कहानी में छुपी गहराई – मज़ाक-मज़ाक में बड़ा सामाजिक संदेश
फिल्म सिर्फ एक आदमी की तीन पत्नियाँ” जैसी कॉमेडी नहीं है। यह दिखाती है कि प्यार किसी धर्म या कागज़ के नियमों में नहीं बँधता। एक सीन में सानिया के पिता मोहन से पूछते हैं:
क्या तुम प्यार के लिए धर्म बदल दोगे? मोहन का जवाब गहरा है प्यार बदलने का नहीं, अपनाने का नाम है। यह संवाद फिल्म का ह्रदय है।
फिल्म धर्मों की विविधता को मज़ाक नहीं बनाती, बल्कि विस्तार से दिखाती है कि:
- इंसान धर्म बदल सकता है
- पर दिल नहीं
- खून नहीं
- इंसानियत नहीं
रिपब्लिक डे वाले सीन में जब मोहन एक ही दिन में तीन बार अपने तीन नामों में खून दान करता है यह दृश्य मासूम कॉमेडी में छुपा सबसे खूबसूरत संदेश देता है:
एक आदमी, तीन नाम—but same blood.
धर्म बदलने से इंसान नहीं बदलता।
यहाँ फिल्म Amar Akbar Anthony की याद दिलाती है एकता का, भाईचारे का, पूरा भारतीय भाव।

फिल्म में महिलाओं की भूमिका – इस बार ज्यादा संवेदनशील
पहली फिल्म की तुलना में दूसरी फिल्म में महिलाओं को बहुत बेहतर ढंग से पेश किया गया है। मीरा, रूही और जेनी सिर्फ “कॉमेडी का हिस्सा” नहीं हैं। भावनात्मक
- समझदार
- इंसानियत से भरी
- और अपनी आवाज़ वाली महिलाएँ हैं
हालाँकि फिल्म अभी भी पुरुष दृष्टिकोण से चलती है, लेकिन यह साफ दिखता है कि इस बार किरदारों को सम्मान और गहराई देने की कोशिश की गई है।
कपिल शर्मा का अभिनय – परिपक्व, संवेदनशील और मज़ेदार
यह फिल्म कपिल शर्मा के कॉमिक विकास को भी दर्शाती है। पहले जहाँ उनकी कॉमेडी सिर्फ मज़ाक उड़ाने और punchlines पर आधारित थी, अब उनकी कॉमेडी:
- उद्देश्यपूर्ण
- संवेदनशील
- और दिल से निकलने वाली बन गई है
उनका किरदार केवल एक Confused Husband नहीं, बल्कि एक ऐसा भारतीय है जो प्यार के लिए हर सीमा पार कर सकता है। उनकी टाइमिंग, बॉडी लैंग्वेज, भावनाओं की प्रस्तुति, और संवाद बोलने की फुर्ती फिल्म को पकड़े रखती है।
FAQs
Q1. Kis Kisko Pyaar Karoon 2 की कहानी क्या है?
एक आदमी जो अपने प्यार के लिए धर्म बदलता है लेकिन गलती से तीन अलग-अलग महिलाओं से शादी कर बैठता है।
Q2. क्या फिल्म कॉमेडी है या ड्रामा?
कॉमेडी-ड्रामा, जिसमें गहरी सामाजिक संवेदनशीलता है।
Q3. क्या कपिल शर्मा का अभिनय बेहतर है?
हाँ, बेहद परिपक्व और दिल छू लेने वाला।
Q4. क्या महिलाएँ सिर्फ मज़ाक का हिस्सा हैं?
नहीं, इस बार उनकी भूमिकाएँ कहीं मजबूत हैं।
Q5. फिल्म का मुख्य संदेश क्या है?
धर्म इंसान को नहीं बाँट सकता—प्यार सबको जोड़ता है।
Q6. रनटाइम कितना है?
2 घंटे 24 मिनट।
Q7. डायरेक्टर कौन हैं?
अनुकल्प गोस्वामी।
Q8. क्या यह फैमिली फिल्म है?
हाँ, पूरी तरह परिवार के साथ देखने योग्य।
Q9. पहली फिल्म से बेहतर है?
कहानी, संवेदनशीलता और संदेश के मामले में—हाँ।
Q10. क्या फिल्म देखने लायक है?
अगर आप कपिल शर्मा की कॉमेडी और सामाजिक व्यंग्य पसंद करते हैं तो यह ज़रूर देखें।