Mere Husband Ki Biwi Movie Review 2025– अर्जुन कपूर, भूमि पेडनेकर और रकुल प्रीत सिंह की नई रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म कैसी रही? जानिए कहानी, परफॉर्मेंस, डायरेक्शन, म्यूजिक और ऑडियंस रिएक्शन एक विस्तृत समीक्षा में।
परिचय: एक रिश्ते की दो कहानियाँ
“Mere Husband Ki Biwi” एक ऐसी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म है जो रिश्तों की उलझनों, यादों और दूसरे मौके की कहानी कहती है। mere Husband Ki Biwi फिल्म में अर्जुन कपूर, भूमि पेडनेकर और रकुल प्रीत सिंह लव-ट्रायंगल के जाल में फंसे हैं — लेकिन यह वही पुरानी कहानी नहीं है जो हमने सैकड़ों बार देखी हो।इस फिल्म की खासियत यह है कि यह प्यार के बाद की ज़िंदगी और भूल जाने की दर्दनाक कीमत को हंसी-मज़ाक के बीच दिखाने की कोशिश करती है।डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ (जिन्होंने “Pati Patni Aur Woh” जैसी फिल्में दी हैं) एक बार फिर रिश्तों की जटिलता को हल्के फुल्के अंदाज़ में पेश करते हैं।
mere Husband Ki Biwi कहानी: जब पुराना प्यार टकरा गया नए से
अंकुर चड्ढा (अर्जुन कपूर) अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुज़र चुका है — तलाक, अकेलापन और अधूरी मोहब्बत।पाँच साल बाद उसे अपनी कॉलेज क्रश अंतरा खन्ना (रकुल प्रीत सिंह) में सुकून मिलता है। दोनों के बीच पुराने दिनों जैसा मासूम प्यार लौट आता है।
लेकिन किस्मत की चाल तब शुरू होती है जब अंकुर की एक्स-वाइफ प्रभलीन कौर (भूमि पेडनेकर) एक एक्सीडेंट के बाद वापस उसकी ज़िंदगी में आ जाती है।उसे रेट्रोग्रेड एम्नेसिया (Retrograde Amnesia) हो गया है — यानी उसकी याददाश्त के पिछले पाँच साल मिट चुके हैं।अब प्रभलीन को यकीन है कि वो अब भी अंकुर की पत्नी है।अंकुर और अंतरा की आने वाली शादी इस झटके से हिल जाती है।
अब अंकुर के सामने सबसे बड़ा सवाल है —क्या वो अपने अतीत को फिर से जिएगा, या अपने भविष्य को बचाएगा?
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पटकथा और निर्देशन (Screenplay & Direction)
mere Husband Ki Biwi फिल्म की शुरुआत बेहद मजेदार है। पहले 30 मिनट में ही कहानी अंकुर की लाइफ और उसकी नाइटमेयर जैसी शादी को कॉमिक टच के साथ दिखाती है।मुदस्सर अज़ीज़ ने रिश्तों की असलियत को बिना ज़्यादा बोझिल बनाए हास्य के ज़रिए पेश किया है।
हालांकि, पहला हाफ थोड़ा लंबा खिंचता है, और कई जगह फिल्म “थोड़ी और कसावट” की मांग करती है।लेकिन दूसरा हाफ इस कमी को पूरी तरह भर देता है — भूमि और रकुल के बीच की हंसी से भरी टकरार फिल्म की जान है।
डायरेक्टर ने रिश्तों की जटिलता को “कौन सही, कौन गलत” के फ़ॉर्मूले में नहीं बाँधा—बल्कि दोनों महिलाओं को इंसान की तरह दिखाया है, जो अपने-अपने तरीके से सही हैं। यही वजह है कि फिल्म भावनात्मक भी लगती है और मनोरंजक भी।
अभिनय (Acting Performances)
अर्जुन कपूर – अंकुर चड्ढा
अर्जुन इस बार ज़्यादा सहज और रिलेटेबल लगे हैं।उनका किरदार एक ऐसे आम आदमी का है जो अपनी गलतियों के बोझ में भी मुस्कराने की कोशिश करता है। कुछ इमोशनल सीन में उन्होंने अपने पुराने काम से बेहतर प्रदर्शन दिया है, खासकर वह डायलॉग –“मैं कोई ट्रॉफी नहीं जो दो लोग जीतने की कोशिश कर रहे हैं।”
यह सीन वाकई असर छोड़ जाता है।
भूमि पेडनेकर – प्रभलीन
भूमि ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो मजबूत भी है और असुरक्षित भी।
उनके संवाद और बॉडी लैंग्वेज दोनों उनके किरदार की गहराई दिखाते हैं।कहीं-कहीं वे लाउड लगती हैं, लेकिन उनकी emotional vulnerability फिल्म को और मानवीय बनाती है।
रकुल प्रीत सिंह – अंतरा
रकुल ने यहां अपनी सबसे संतुलित परफॉर्मेंस दी है।उनका किरदार आधुनिक सोच रखता है, पर वह भावनाओं से खाली नहीं है।अंतरा और प्रभलीन के बीच के सीन, खासकर engagement party वाला सीन, दर्शकों को खूब पसंद आया।
हर्ष गुजराल – रेहान
स्टैंडअप कॉमेडियन हर्ष गुजराल ने फिल्म में जान डाल दी है।उनके कॉमिक टाइमिंग और पंच डायलॉग्स दर्शकों को लगातार एंटरटेन करते हैं।उनका किरदार फिल्म को बहुत हल्का और मजेदार बना देता है।
म्यूज़िक और सिनेमैटोग्राफी
फिल्म का म्यूज़िक औसत है लेकिन “इक वारी” और “गोरी हैं कलाईयाँ” जैसे गाने सुनने में सुखद लगते हैं।BGM (Background Score) भावनात्मक दृश्यों को सही टोन देता है।कैमरावर्क में स्कॉटलैंड और दिल्ली दोनों का संतुलित मिश्रण है —स्कॉटलैंड के फ्रेम रोमांटिक हैं, जबकि दिल्ली के दृश्य रिलेटेबल लगते हैं।
डायलॉग्स जो दिल में उतरते हैं
- “कभी-कभी याददाश्त चली जाए तो दर्द भी साथ चला जाता है।”
- “प्यार दोबारा हो सकता है, लेकिन भरोसा दोबारा नहीं।”
- “कभी किसी को इतना मत भूलो कि वो लौटे तो पहचान न पाओ।”
ऐसे कई संवाद फिल्म को भावनात्मक ऊंचाई देते हैं।
क्या कमी रह गई?
- फिल्म का पहला हाफ थोड़ा खींचा गया है, जिससे कुछ दर्शकों को बोरियत हो सकती है।
- कॉमेडी सीन्स हर जगह काम नहीं करते।
- क्लाइमैक्स थोड़ा जल्दबाज़ी में निपटाया गया है, जिससे इमोशनल इम्पैक्ट कम होता है।
लेकिन ये कमियाँ फिल्म को देखने लायक होने से नहीं रोकतीं।
क्या है फिल्म का असली मैसेज?
फिल्म कहती है कि रिश्ते सिर्फ यादों से नहीं, बल्कि माफ़ी और समझ से चलते हैं।यह सिर्फ प्यार की नहीं, बल्कि सेकंड चांस लेने की हिम्मत की कहानी है।
यह बताती है कि कभी-कभी “पुराना प्यार छोड़ना” ही असली मोहब्बत होती है।
देखें या छोड़ें?
अगर आपको हल्की-फुल्की romantic-comedy पसंद है जिसमें इमोशन और हंसी दोनों का संतुलन हो, तो Mere Husband Ki Biwi एक perfect weekend movie है।
यह ना बहुत गहरी है, ना बहुत ड्रामेटिक — बस सच्ची, मजेदार और रिलेटेबल।⭐ रेटिंग: 3.5 / 5
🎬 “एक बार ज़रूर देखी जा सकती है — दिल भी हंसेगा और दिमाग भी आराम पाएगा।”
FAQs – दर्शकों के सबसे पूछे जाने वाले सवाल
Q1. Mere Husband Ki Biwi फिल्म किस जॉनर की है?
Romantic-Comedy ड्रामा फिल्म है जिसमें हल्की-फुल्की भावनाएँ और मजेदार लव ट्रायंगल दिखाया गया है।
Q2. क्या फिल्म परिवार के साथ देखी जा सकती है?
हाँ, फिल्म पूरी तरह फैमिली फ्रेंडली है, किसी तरह का आपत्तिजनक सीन नहीं है।
Q3. फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा कौन सा है?
भूमि और रकुल के बीच के कॉमेडी-भरे टकराव और भावनात्मक सीन सबसे असरदार हैं।
Q4. क्या यह फिल्म अर्जुन कपूर की बेस्ट फिल्मों में से एक है?
परफॉर्मेंस के लिहाज से हाँ, यह अर्जुन की कुछ संतुलित और mature फिल्मों में से एक है।
Q5. क्या फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई?
फिल्म को औसत लेकिन स्थिर रिस्पॉन्स मिला है। दर्शक इसे “टाइमपास लेकिन इमोशनल” कह रहे हैं।