Saali Mohabbat Movie Review: राधिका आप्टे की खामोश थ्रिलर, प्यार से कत्ल तक की कहानी

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Saali Mohabbat Movie Review: राधिका आप्टे, दिव्येंदु शर्मा और अनुराग कश्यप की थ्रिलर-ड्रामा फिल्म प्यार, धोखा और साजिश की खामोश लेकिन गहरी कहानी कहती है।

Saali Mohabbat Movie Review: प्यार, धोखा और खामोशी के बीच बुनी एक सिहरन पैदा करने वाली कहानी

OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई फिल्म ‘साली मोहब्बत’ एक ऐसी थ्रिलर-ड्रामा फिल्म है, जो प्यार की मासूम शुरुआत से लेकर नफरत और कत्ल तक की यात्रा को बेहद ठंडे लेकिन गहरे अंदाज़ में दिखाती है। हसीन दिलरुबा के बाद लंबे वक्त में यह उन फिल्मों में से है, जहां मोहब्बत सिर्फ इश्क नहीं, बल्कि जिद, बदला और खामोश साजिश बन जाती है।

राधिका आप्टे, दिव्येंदु शर्मा और अनुराग कश्यप जैसे मजबूत कलाकारों के साथ यह फिल्म आपको चौंकाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे आपको अपने जाल में फंसाती है।

 Saali Mohabbat Movie Review: कहानी,जब प्यार सहने की हद पार कर देता है

फिल्म की कहानी स्मिता नाम की एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी दुनिया उसके पति और पेड़-पौधों तक सिमटी हुई है। पिता की मौत के बाद उनका पुश्तैनी घर ही उसकी सबसे बड़ी भावनात्मक पूंजी है। स्मिता के किरदार में राधिका आप्टे एक शांत, सहनशील और भीतर से टूटी हुई पत्नी के रूप में नजर आती हैं।

उसका पति पंकज तिवारी (अंशुमन पुष्कर) बाहर से बेरोजगार, अंदर से लालची और जुए की लत में डूबा इंसान है। वह लगातार स्मिता पर पिता का घर बेचने का दबाव बनाता है ताकि अपने कर्ज चुका सके।

कहानी में एक अहम मोड़ तब आता है जब स्मिता की मौसेरी बहन शालू (सौरसेनी मैत्रा) नौकरी के बहाने उसी घर में रहने आ जाती है। शालू के आने के बाद रिश्तों की परतें खुलनी शुरू होती हैं  नजदीकियां, धोखा और लालच सब एक साथ सिर उठाते हैं।

इसी बीच कहानी में एंट्री होती है पुलिस इंस्पेक्टर रतन पंडित (दिव्येंदु शर्मा) की, जो बड़े सपने देखता है लेकिन छोटे रास्तों से उन्हें पूरा करना चाहता है।

और फिर  एक दिन स्मिता के पति पंकज और शालू की लाशें एक साथ मिलती हैं।  कातिल कौन है?  मकसद क्या है?  और क्या सच वही है जो दिख रहा है? इन सवालों के जवाब फिल्म धीरे-धीरे खोलती है।

Saali Mohabbat Movie Review : शांत लेकिन सटीक कोशिश

टिस्का चोपड़ा की यह पहली फुल-लेंथ डायरेक्टोरियल फिल्म है और यह बात साफ दिखती है कि उन्होंने कहानी को शोर नहीं, बल्कि खामोशी से कहने की कोशिश की है।

निर्देशन में सादगी है, लेकिन यही सादगी कई जगहों पर फिल्म को प्रेडिक्टेबल भी बना देती है। कई सीन पहले से भांप लिए जाते हैं, जिससे सस्पेंस कमजोर पड़ता है।

हालांकि, जिन दर्शकों को स्लो-बर्न थ्रिलर पसंद है, उनके लिए फिल्म टिकाऊ साबित होती है।

Saali Mohabbat Movie Review:म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक इसकी सबसे कमजोर कड़ी है।  कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो लंबे समय तक याद रहे। कई जगह बैकग्राउंड म्यूजिक जबरन ठूंसा हुआ लगता है, जहां उसकी जरूरत ही नहीं थी। हालांकि करण कुलकर्णी का बैकग्राउंड स्कोर कुछ सीन में तनाव को बढ़ाने में मदद करता है।

अभिनय: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

 राधिका आप्टे

स्मिता और कविता  दोनों किरदारों में राधिका आप्टे पूरी तरह उतर जाती हैं। उनकी आंखें कई बार बिना संवाद बोले कहानी कह जाती हैं। यह उनका बेहद नियंत्रित और परिपक्व अभिनय है।

 दिव्येंदु शर्मा

इंस्पेक्टर रतन के किरदार में दिव्येंदु संयम और बेचैनी का बेहतरीन संतुलन दिखाते हैं। यह उनका अब तक का सबसे सधा हुआ परफॉर्मेंस लगता है।

 अंशुमन पुष्कर

पंकज के किरदार में कई शेड्स हैं लालच, डर, कमजोरी। अंशुमन इन सबको अच्छे से निभाते हैं।

 अनुराग कश्यप

खलनायक ‘भैयाजी’ के रोल में अनुराग कश्यप प्रभाव छोड़ने में चूक जाते हैं। उनका किरदार सीमित दायरे में सिमट कर रह जाता है।

सपोर्टिंग रोल में शरत सक्सेना कम स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं।

प्रतीक और मेटाफर: पौधों के जरिए जिंदगी का सबक

फिल्म में पौधों को जीवन, धैर्य और सहनशीलता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया है। यह एक दिलचस्प प्रयोग है, जो कहानी के भावनात्मक पहलू को मजबूत करता है और याद भी रहता है।

अनुत्तरित सवाल और संभावित सीक्वल

फिल्म कई सवाल खुला छोड़ देती है:

  • शालू का अतीत क्या था?
  • पंकज को इतना कर्ज कैसे मिला?
  • शालू के रिश्तों के पीछे की मानसिकता क्या थी?

टिस्का चोपड़ा ने खुद दूसरे पार्ट की बात कही है। संभव है इन सवालों के जवाब वहां मिलें।

Saali Mohabbat Movie Review: देखें या नहीं देखें?

अगर आपको थ्रिलर, सस्पेंस और स्लो-बर्न कहानियां पसंद हैं, तो साली मोहब्बत आपको निराश नहीं करेगी।  यह फिल्म तेज़ नहीं है, लेकिन भीतर तक चुभने वाली है

हां, अगर आप हर चीज़ में लॉजिक ढूंढते हैं या तेज़ रफ्तार मनोरंजन चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको कुछ जगहों पर भारी लग सकती है।

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