‘Single Salma Movie Review in Hindi’ पढ़ें – हुमा कुरैशी की इमोशनल जर्नी, समाज की सोच पर सवाल, मगर ढीली पटकथा ने कम किया असर।
Single Salma Movie Review in Hindi: हुमा कुरैशी की दमदार अदाकारी, मगर कमजोर पटकथा खींच लेती है फिल्म की रफ्तार
लेखक: Ravindra Kumar | अपडेटेड: 03 नवंबर 2025
फिल्म का परिचय
‘सिंगल सलमा (Single Salma)’ एक ऐसी कहानी है जो आधुनिक भारतीय महिला की जद्दोजहद और आत्म-सम्मान की खोज को बारीकी से उकेरती है। फिल्म का निर्देशन नचिकेत सामंत ने किया है, जबकि कहानी अमीना खान ने लिखी है। इसमें हुमा कुरैशी, श्रेयस तलपड़े, सनी सिंह और निधि सिंह जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आते हैं।
यह फिल्म उन तमाम लड़कियों की आवाज है जो परिवार, समाज और परंपराओं के दबाव में अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
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कहानी :Single Salma Story
फिल्म की कहानी लखनऊ की रहने वाली सलमा रिजवी (हुमा कुरैशी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक सरकारी विभाग में इंजीनियर है। सलमा एक पुराने नवाब (कंवलजीत सिंह) की बेटी है, जिसकी नवाबी तो कब की खत्म हो चुकी, लेकिन शानो-शौकत का भ्रम अब भी बाकी है।
घर की गिरवी हवेली, बहनों की शादियाँ और भाई के क्रिकेट करियर के खर्च – ये सब जिम्मेदारियाँ सलमा के कंधों पर हैं। अपने सपनों को कुर्बान कर चुकी 33 साल की सलमा समाज की नज़रों में “शादी लायक उम्र” पार कर चुकी है, और गली-मोहल्ले के ताने उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
इसी बीच उसकी मां की ज़िद पर शादी की बात आगे बढ़ती है और उसकी मुलाकात होती है सिकंदर (श्रेयस तलपड़े) से – जो सूटिंग-शर्टिंग की दुकान चलाने वाला ईमानदार और सादा मिजाज व्यक्ति है। दोनों के बीच रिश्ता तय होता है, लेकिन मंगनी के दिन ही सलमा को ऑफिशियल ट्रेनिंग के लिए लंदन जाना पड़ता है।लंदन में उसकी मुलाकात होती है मीत (सनी सिंह) से — एक खुले ख्यालों वाला युवक जो “ओपन रिलेशनशिप” में यकीन रखता है। यहां सलमा खुद को नए सिरे से पहचानने लगती है और धीरे-धीरे मीत के प्यार में भी डूब जाती है। अब सवाल ये उठता है — क्या सलमा सिकंदर से शादी करेगी या मीत को चुनेगी? फिल्म इसी दुविधा का जवाब देती है।
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किरदार और अभिनय (Performance & Characters)
- हुमा कुरैशी ने सलमा के रूप में गहरी भावनाओं को बखूबी जिया है। एक ऐसी महिला जो जिम्मेदारियों और आत्म-सम्मान के बीच फंसी है — हुमा ने उस दर्द और द्वंद्व को बेहद संवेदनशील तरीके से पर्दे पर उतारा है।
- श्रेयस तलपड़े अपने मासूम और सादगी भरे किरदार से दिल जीत लेते हैं। सिकंदर के रूप में उनकी ईमानदारी और सच्चाई कहानी में गर्माहट लाती है।
- सनी सिंह ने मीत के मॉडर्न और फ्लर्टी किरदार को आत्मविश्वास के साथ निभाया है। हालांकि हुमा और सनी की केमिस्ट्री में गहराई की कमी महसूस होती है।
निधि सिंह, नवनी परिहार, और आसिफ खान जैसे कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं में जान डाली है, जिससे फिल्म का दूसरा हिस्सा मजबूत बनता है।

निर्देशन और पटकथा (Direction & Screenplay)
निर्देशक नचिकेत सामंत ने फिल्म को एक गंभीर सामाजिक विषय पर आधारित किया है। वह दिखाना चाहते हैं कि समाज कैसे महिलाओं की उम्र, कपड़ों और फैसलों से उनके “चरित्र” को जोड़ देता है।हालांकि फिल्म की पटकथा (रवि कुमार द्वारा लिखी गई) कुछ हिस्सों में कमजोर पड़ जाती है। कई बार कहानी अपने मूल मुद्दे से भटक जाती है और अनावश्यक ड्रामा जोड़ देती है। क्लाइमैक्स का भाषणनुमा सीन फिल्म की गंभीरता को कम कर देता है।
डायलॉग्स और संगीत (Dialogues & Music)
मुदस्सर अजीज के लिखे डायलॉग्स फिल्म की असली ताकत हैं। कुछ पंचलाइनें दर्शकों को मुस्कराने पर मजबूर कर देती हैं, खासकर जब सलमा समाज के ताने को जवाब देती है। हालांकि फिल्म का संगीत कमजोर है। सोहेल सेन और जस्सी संधू का म्यूजिक दर्शकों पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं छोड़ता। गाने कहानी की रफ्तार को रोक देते हैं, जो फिल्म का बड़ा नेगेटिव पॉइंट है।
Single Salma movie Weaknesses
कहानी में उठाए गए मुद्दे — जैसे महिलाओं की आजादी, बेटे की चाह, कपड़ों से जजमेंट, और सेल्फ-लव — सभी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गहराई से नहीं खोजे गए।
- फिल्म के कई सीन बेवजह खींचे गए हैं, जिससे नैरेटिव ढीला पड़ जाता है।
- सलमा के “बिकिनी फोटो विवाद” जैसे कुछ सीन गैरजरूरी और बनावटी लगते हैं।
- फिल्म “क्वीन” जैसी प्रेरक तो बनना चाहती है, लेकिन वहां तक पहुंच नहीं पाती।
पॉजिटिव पॉइंट्स (Highlights)
- हुमा कुरैशी का शानदार अभिनय
- कुछ मजेदार और भावनात्मक डायलॉग
- समाज के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाने की कोशिश
- महिला सशक्तिकरण का भावनात्मक संदेश
अंतिम फैसला (Verdict)
‘सिंगल सलमा (Single Salma)’ एक ऐसी फिल्म है जो सही इरादों से बनाई गई है — यह महिलाओं के आत्म-सम्मान और स्वतंत्र सोच की वकालत करती है। लेकिन कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले के कारण यह प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहती है।
हुमा कुरैशी का अभिनय फिल्म को थामे रखता है, लेकिन कहानी उतनी सशक्त नहीं बन पाती जितनी उम्मीद थी।
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)
👉 क्यों देखें: क्योंकि यह फिल्म समाज की सोच को बदलने की कोशिश करती है और आपको “सेल्फ-लव” का असली मतलब समझाती है।