Thamma movie Review in Hindi 2025: डर, प्यार और कॉमेडी का Unexpected Mix

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जानिए Thamma movie Review in Hindi 2025 कैसे आयुष्मान खुराना, रश्मिका मंदाना और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की यह हॉरर-कॉमेडी-रोमांस भारतीय लोककथाओं और आधुनिक भय को जोड़ती है। पढ़िए “थमा” का पूरा रिव्यू, कहानी, निर्देशन और परफॉर्मेंस एनालिसिस।

Thamma movie

फिल्म का हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स पहले नई मजेदार और अनएक्सपेक्टेड फिल्मों के लिए जाना जाता था अगर “स्त्री ” मूवी डर का एहसास कराया और “भेड़िए” ने जंगल की दुनिया में एक सोशल मैसेज दिया तो thamma movie review in hindi 2025 ने प्यार और डर को जोड़ते हुए एक नई अलग कहानी पेश की है।

यह कहानी एक रहस्यमई जंगल से शुरुआत हो जाती है, जहां प्राचीन की परछाई अभी मौजूद है और पुराने रक्षक फिर से जागने लगी “स्त्री” और “भेड़िए” जैसी फिल्मों ने जानवर को मजबूत बनाया ऐसे में जब थामा (Thamma) आई है तो ऑडियंस को उम्मीद है कि यह यूनिवर्स नयी बुलंदियों को छूएगा। लेकिन यूजर के रिव्यु के बाद लगता है कि फिल्म “थामा” आसमान को नहीं छु-पएगी क्योंकि फिल्म क्योंकि फिल्म ज्यादा मजेदार नहीं साबित हो पाई हैं फिल्म उम्मीद को पूरा नहीं कर रही है जिसे लोगों को उम्मीद थी।

फिल्म के रिव्यू की बात करें तो मिलाअसर असर देखने को मिलता है कोई बताता है ना डरती है, ना हंसती है कहानी भी अधूरी लगती है तो कोई और कहानी का रिव्यू दे रहा है।

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क्या है कहानी?

फिल्म “Thamma” आयुष्मान खुराना के इर्द-गिर्द घूमती है फिल्म में आयुष्मान खुराना दिल्ली के पत्रकार ‘आलोक’ हैं जो की अपने दोस्तों के साथ ट्रैकिंग पर जाते हैं और ट्रैकिंग के दौरान अचानक उनके ऊपर “भालू “हमला करता है और रश्मिका मंदाना उनकी जान बचाती हैं इसके बाद वह वैंपायर की दुनिया में फंस जाती हैं।


कहानी की शुरुआत बड़ी ही रोचक है लेकिन जैसे ही फिल्म इंटरवल होता है उसके फिल्म की कहानी, सब बिखर जाता है का असर बचता है ना रोमांस अब लोग कहें तो क्या या कॉमेडी का संतुलन है क्लाइमेक्स बहुत जल्दबाजी में खत्म हो गया है जिससे अंत में कोई इमोशनल असर नहीं दिखाई देता है।


आम हॉरर फिल्मों की तरह या सिर्फ डर नहीं है कहानी में प्यार हिम्मत और अपनों की रक्षा के लिए की गई कोशिश से भी हैं फिल्म में कॉमेडी और इमोशन बहुत ही बैलेंस और सुंदर रखे गए हैं कभी मजेदार तो कभी दिल छूने वाला सीन दिखाई देता है जो थिएटर से निकलने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहती है।

Thamma review Hindi

फिल्म थम की शुरुआत आयुष्मान खुराना से होती है आयुष्मान खुराना अपने किरदार में ठीक से बैठते हैं उन्होंने अपने किरदार को एक डर के माहौल में और उत्सुकता के भाव को दिखाने की कोशिश की है।
फिल्म की कहानी कमजोर दिखाई पड़ती है आयुष्मान खुराना शुरुआत में हल्का-फुल्का और अपनापन दिखाते हैं लेकिन कहानी के बढ़ाते- बढ़ाते उनके कैरेक्टर में गहराई आने लगती है।

Thamma movie review in hindi 2025
Thamma movie review in hindi 2025

बात की जाए रश्मिका मंदाना नहीं अपनी रोल को बड़ी ही ईमानदारी और इमोशनल तरीके से अदा किया है वह हॉरर कॉमेडी फिल्मों की आम ओवर थे टॉप हीरोइन नहीं लगते हैं उनकी एक्टिंग एकदम ओरिजिनल दिखाई देती है उनका डायलॉग डिलीवरी बहुत ही शानदार है जिससे सीन में इमोशन बिल्कुल नजर आता है।

Thamma movie review in hindi 2025
Thamma movie review in hindi 2025(image credit:instagram)

फिल्म धाम में नवाजुद्दीन सिद्दीकी वैंपायर के रूप में कई जगह बहुत ही ज्यादा ड्रैमेटिक और ओवर थे टॉप दिखाई पड़ते हैं जिसके कारण मूवी में कई सीन हंसी के पात्र बन जाते हैं जिससे मूवी का टोन बिगड़ने लगता है परेश रावल हलका हाथ से जोड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन मूवी में उन्हें जो रोल दिया गया वह सही से अदा नहीं हुआ है जैसे उन्होंने मजाक करना याद आया है लेकिन तरीके भूल गए हैं वाली शैली अपनाई गई हो।

Thama Review 2025
Thama Review 2025(image credit:instagram)

फिल्म में अभिषेक बनर्जी कैमियो में आते हैं और एक झलक के लिए याद रहते हैं वहीं वरुण धवन का कैमियो हल्का लंबा है लेकिन लेकिन कहानी में जान डालने से चूक जाते हैं फिल्म में आलोक और भेड़िया (वरुण धवन) के बीच एक दमदार टकराव भी देखने को मिलता है एक ऐसा पल भी आता है जिसमें हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स के बड़े एक्सपेंशन की झलक देता है।

Thama Review 2025
Thama Review 2025(image credit:instagram)

कैसी है फिल्म देखें या नहीं देखें: फिल्म Thamma movie केवल उन लोगों के लिए है जो आयुष्मान खुराना और रश्मिका को स्क्रीन पर देखना पसंद करते हैं कहानी हॉरर कॉमेडी में ज्यादा दम नहीं है वरुण धवन का कैमियो भी दिखाए तक सीमित रहा है कुल मिलाकर फिल्म पूरी तरह निराशाजनक है ना डरती है ना हंसती है और फिल्म देखने लायक कोई चीज नहीं छोड़ती है।
फिल्म के वीएफएक्स शानदार हैं वही ऊंचा विजिबल स्टैंडर्ड बनाए रखते हैं जिसके लिए फिल्म में प्रोडक्शन हाउस जाना जाता है।
सभी किरदार आपस में कैसे जुड़े हुए हैं।

निर्देशन और स्क्रीनप्ले

निर्देशक आदित्य सरपोदार ने “थमा” में एक परिपक्व, प्रतीकात्मक और अप्रत्याशित टोन स्थापित किया है। यह फिल्म उनके पिछले कार्यों जैसे मुंज्या और स्त्री के बीच एक आध्यात्मिक मध्य-बिंदु की तरह प्रतीत होती है।

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फिल्म की शैली में हॉरर, कॉमेडी और रोमांस का मिश्रण है — और साथ ही लोककथा-संधर्भ जो इसे सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहने देती। कहीं-कहीं दृश्य-निर्माण (विजुअल) में कमियाँ दिखती हैं, पर कलर-ग्रेडिंग और सेट-डिजाइन ने इसका प्रभाव कम करने में मदद की है।

लेकिन सिर्फ सेट और सिनेमैटोग्राफी पर भरोसा करके उन्होंने कहानी को ध्यान से देखा तक नहीं।
फिल्म में दिखावा है कहानी में कोई दम नजर नहीं आ रही है फिल्म का टोन शुरुआत में अच्छा है, बाद में बिल्कुल ही अलग , एक सीन में डर ,अगले में हल्की कॉमेडी, जिसे देखने वाला खुद समझ नहीं पता उसे हंसना है या डरना है।
स्क्रीन प्ले इंटरवल के बाद पूरी तरह बिखर जाती है और सीन सिर्फ ठीक दिखाने के लिए डाले गए हैं जो कहानी को और कमजोर और उबाऊ बन जाते हैं।

तकनीकी पक्ष: संगीत, ग्राफिक्स और एडिटिंग
फिल्म के संगीत में अधिकांश गाने अच्छे हैं और फिल्म में उनकी प्लेसमेंट उपयुक्त है। सेट-डिजाइन और कलर-ग्रेडिंग ने काफी मेहनत दिखाई है।
हालाँकि, ग्राफिक्स (VFX/CGI) में कुछ कमजोरी महसूस होती है — खासकर जब इसे एक बड़े सिनेमैटिक यूनिवर्स के हिस्से के रूप में देखा जाता है। इससे फिल्म का तकनीकी पक्ष थोड़ा पीछे रह जाता है, लेकिन कहानी-ड्रिवन दृष्टिकोण और अभिनय ने यह कमी आंशिक रूप से छिपा दी है।

मजबूती और कमजोरियाँ

मजबूती

लोककथाओं और आधुनिकता का संगम: यह फिल्म दिखाती है कि कैसे पुरानी कहानियाँ आज के समय में भी प्रासंगिक हो सकती हैं।

कहानी में गहराई: सिर्फ डर-हास्य का मेल नहीं, बल्कि प्रेम के खोने का भय और संस्कृति के बोझ का विश्लेषण।

कलाकारों की विविधता और बदलाव: प्रमुख भूमिकाएँ उच्च स्तर की हैं।

कमजोरियाँ

दूसरा भाग खिंचा महसूस होता है — समझाने-समझाने में कहानी का प्रवाह धीमा पड़ता है।

ग्राफिक्स में अपेक्षित स्तर नहीं — एक यूनिवर्स फिल्म में यह थोड़ा चिंताजनक है।

कॉमिक कैरेक्टर्स की लेखन-ताजा नहीं — पिछले फिल्मों के स्वरूप से बहुत फर्क नहीं दिखाता।

दर्शक अनुभव

यदि आप हॉरर-कॉमेडी-रोमांस के मिश्रित स्वाद के प्रेमी हैं, तो “थमा” एक अनुभव-योग्य फिल्म है। थिएटर में देखने पर बड़ी स्क्रीन पर लोककथा-विजुअल्स का आनंद मिलेगा। परंतु यदि आप गति-प्रवाह-उच्च रफ़्तार की फिल्म पसंद करते हैं, तो दूसरे भाग की लम्बाई आपको बीच में खींच सकती है।


अगर आप इस फिल्म को देख रहे हों, तो सुझाव है कि पूरी मानसिकता के साथ जाएँ — डर-हास्य-प्रेम के मिश्रण के लिए तैयार रहें और टेक्निकल कमियों को हल्के में देखें।

FAQs

Q1. थमा फिल्म किस यूनिवर्स का हिस्सा है?
A1. थमा Maddock Horror Comedy Universe (MHCU) की पाँचवीं फिल्म है।
क्या बनाया

Q2. क्या थमा सिर्फ हॉरर-कॉमेडी है?
A2. नहीं, यह हॉरर-कॉमेडी के साथ-साथ रोमांस और लोककथाओं का मिश्रण है, जिसमें आधुनिक जीवनशैली और मिथकों का टकराव दिखाया गया है।

Q3. फिल्म की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
A3. इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार (आयुष्मान खुराना, रश्मिका मंदाना, नवाजुद्दीन सिद्दीकी) और इसकी कहानी-गहराई है जो सिर्फ डर-हास्य से आगे जाती है।

Q4. फिल्म की कमजोरियाँ क्या-क्या हैं?
A4. प्रमुख कमजोरियाँ हैं – दूसरा भाग थोड़ा लम्बा खिंचा हुआ महसूस करना, और ग्राफिक्स (VFX) का अपेक्षा से कम स्तर।

Q5. क्या यह फिल्म बच्चों के लिए उपयुक्त है?
A5. चूंकि इसमें हॉरर-तत्व और सुपरनैचुरल सीन हैं, इसलिए 13+ या परिवार-साथ देखने योग्य हो सकती है, लेकिन नर्वस बच्चों के लिए चुनौतिपूर्ण हो सकती है।

Q6. फिल्म देखने के लिए कौन-सा मूड सही रहेगा?
A6. यदि आप हल्के डर, हास्य, रोमांस और लोककथाओं के संगम का आनंद लेना चाहते हैं — तो थमा देखने का सही मूड है: खुला दिमाग, थोड़ा धीरज, और कहानी-भाषा-विजुअल को एक-साथ स्वीकारने का विचार।

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