Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025 – हर्षवर्धन-सोनम की रोमांटिक जंग जिसने सबको चौंकाया!

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हर्षवर्धन राणे और सोनम बाजवा की फिल्म Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025 प्यार और अहंकार की टकराहट है। पढ़ें पूरी कहानी, रिव्यू और दर्शकों की प्रतिक्रिया।

Ek Deewane Ki Deewaniyat Movie Review

फिल्म निर्माता मिलाप जावेरी ने अपनी लेटेस्ट फिल्म एक दीवाने की दीवानियत के साथ दर्शकों के सामने एक बड़े प्रेम-कहानी का पर्दा उठाया है। इस फिल्म में प्रमुख भूमिका में हैं हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा, शाद रंधावा, सचिन खेडेकर और अमिताभ बच्चन (विशेष भूमिका में)।
यह फिल्म एक शक्तिशाली नेता के पुत्र और एक आत्म-विश्वासी नायिका की टकराहट, प्यार, बदला और अंततः आत्म-बोध की कहानी बताती है।

Thamma movie Review in Hindi 2025: डर, प्यार और कॉमेडी का Unexpected Mix

कहानी

एक दीवाने की दीवानियत’ समीक्षा: प्यार, शक्ति और जुनून की कहानी

दर्शकों को इस मूवी का काफी दिनों से इंतजार था क्योंकि मूवी रोमांटिक है इसलिए फैंस इस मूवी का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं लिए हम जानते हैं एक दीवाने की दीवानी है मूवी का फुल रिव्यू क्या है यानी कहानी में क्या है जानते हैं

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक ऐसे शहर से, जहाँ सत्ता और राजनीति के खेल में इंसानियत की कोई कीमत नहीं बची। यहाँ का सबसे ताकतवर और दबंग नेता है राजनेता भोसले (सचिन खेडेकर), जिसकी तूती पूरे प्रदेश में बोलती है। उसकी सत्ता, उसका पैसा और उसका रुतबा — सबकुछ उसके बेटे विक्रमादित्य भोसले (हर्षवर्धन राणे) के लिए विरासत में छोड़ दिया गया है।

विक्रमादित्य बचपन से ही एक ऐसे माहौल में बड़ा हुआ है जहाँ उसकी हर बात “हुक्म” मानी जाती है।
उसका हर फैसला अंतिम होता है।
उसका हर शब्द “कानून” जैसा है।

वो इतना ताकतवर है कि मुख्यमंत्री तक उसकी बात मानने में संकोच नहीं करता। उसका एक ही मंत्र है —

Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025
Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025

“मेरी मर्ज़ी ही मेरी मर्ज़ी है।”

विक्रम की ज़िंदगी में सब कुछ था — शक्ति, पैसा, सम्मान, डर…
बस एक चीज़ की कमी थी — सच्चे प्यार की।

अदा का प्रवेश: स्टारडम से भरी लेकिन आत्म-सम्मान से परिपूर्ण लड़की

एक दिन विक्रम की नज़र पड़ती है अदा (सोनम बाजवा) पर — जो बॉलीवुड की एक खूबसूरत, चमकदार और आत्मविश्वासी अभिनेत्री है।
अदा सिर्फ एक फिल्म स्टार नहीं, बल्कि अपने दम पर जीने वाली, स्वतंत्र सोच रखने वाली महिला है।
वो मानती है —

“प्यार में बराबरी ज़रूरी है, ज़बरदस्ती नहीं।”

लेकिन विक्रम के लिए अदा का इंकार, उसके अहंकार पर चोट था।
उसने ठान लिया —

“अगर उसने ना कहा है, तो अब मैं हां कहलवाकर रहूंगा।”

Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025
Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025

विक्रम का जुनून बनाम अदा का आत्म-सम्मान

इसके बाद शुरू होता है एक जुनूनी, पागलपन से भरा पीछा।
विक्रम अदा को पाने के लिए हर तरीका अपनाता है —
साम, दाम, दंड, भेद।
वो अपने रसूख, पैसे और ताकत से अदा की ज़िंदगी को चारों तरफ से घेर लेता है।

अदा शुरुआत में उसे नज़रअंदाज़ करती है,
लेकिन जब विक्रम की ज़िद खतरनाक मोड़ लेने लगती है —
वो समझ जाती है कि अब यह “प्यार” नहीं रहा, बल्कि कब्ज़े की कोशिश है।

अदा के लिए प्यार का मतलब था सम्मान,
और विक्रम के लिए प्यार का मतलब था हक़ जताना।

Ek Deewane Ki Deewaniyat Review 2025
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कहानी का टर्निंग पॉइंट: एक औरत की गर्जना

एक दिन, जब विक्रम सार्वजनिक रूप से अदा को शादी का अल्टिमेटम देता है —
एक महीने में शादी करो, नहीं तो पछताओगी।
तो अदा का आत्म-सम्मान घायल हो जाता है।

वो चुप नहीं रहती, बल्कि सामने खड़ी होती है और पूरे समाज के सामने कहती है —

“जो आदमी औरत की ना का मतलब नहीं समझता,
उसे हां सुनाने की औकात नहीं होनी चाहिए।”

अदा अब विक्रम से डरने की बजाय,
उसे उसके ही खेल में हराने का फैसला करती है।

वो अपने गुस्से और प्रतिशोध में मीडिया के सामने ऐलान करती है —

“जो दशहरे तक विक्रमादित्य को मारेगा,
मैं उसके साथ एक रात गुज़ारूंगी।”

पूरा शहर सन्न रह जाता है।
अब विक्रम का प्रेम, एक खूनी खेल में बदल चुका था।

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क्लाइमेक्स: जब प्यार, नफरत और पागलपन एक साथ टकराते हैं

इसके बाद फिल्म एक रोमांचक मोड़ पर पहुँचती है।
शहर में हर कोई विक्रम के पीछे पड़ा है —
कई दुश्मन, कई लालची लोग, और कुछ अदा के चाहने वाले।

विक्रम को अब एहसास होता है कि उसकी “दीवानगी” ने उसे इंसान नहीं,
एक “दानव” बना दिया है।
उसे अब भी अदा से प्यार है,
लेकिन अब वो जान चुका है कि उसका प्यार स्वार्थी और विनाशकारी है।

कहानी का क्लाइमेक्स बहुत ही इमोशनल और इंटेंस है —
जहाँ अदा और विक्रम आमने-सामने आते हैं।
वो एक-दूसरे को देखते हैं,
लेकिन अब उनके बीच प्यार नहीं, पछतावा है।

अदा कहती है —

“प्यार ज़बरदस्ती से नहीं होता,
औरत की ना, कभी भी मर्द की हार नहीं,
बल्कि उसकी इंसानियत की पहचान होती है।”

विक्रम की आंखों में आँसू हैं,
वो पहली बार खुद को “दीवाना” नहीं,
बल्कि पश्चाताप करने वाला आदमी महसूस करता है।

फिल्म यहीं खत्म नहीं होती —
बल्कि दर्शक के दिल में एक सवाल छोड़ जाती है —

“क्या दीवानगी में किया गया प्यार सच में प्यार कहलाता है?”

फिल्म की आत्मा: प्यार की हद और इंसानियत की जीत

“एक दीवाने की दीवानियत” केवल एक रोमांटिक फिल्म नहीं है।
ये समाज में उस सोच को चुनौती देती है जहाँ “ना” को “शर्म” समझा जाता है,
और “प्यार” को “हक़” बना दिया जाता है।

यह कहानी एक जुनूनी आदमी की तबाही और
एक मजबूत औरत की जीत की गाथा है।

टेक्निकल व क्रिएटिव

मिलाप जावेरी की कहानी में मेलोड्रैमेंटिक टर्न्स, भावनात्मक चरमोत्कर्ष और पुरानी फिल्मों की याद दिलाने वाला ड्रामा है। हालांकि कुछ हिस्से ओवर-टॉप लगे और कन्विंसिंग नहीं रहे, लेकिन मुंबई की लोकेशन्स, 90s-वाइब वाला संगीत, गानों की कोरियोग्राफी और कलरफुल सेटिंग ने फिल्म को अंत तक खींचे रखा।

हर्षवर्धन राणे ने अपने रोल में बहुत सारा जान लगाया है — उनकी भूमिका में जुनून है, दर्द है और अधीरता है। वहीं सोनम बाजवा ने खूबसूरती और अभिनय का संतुलन बखूबी निभाया है, फिर भी कुछ दृश्य में केमिस्ट्री की कमी भी दर्शकों ने महसूस की है। शाद रंधावा, सचिन खेडेकर जैसे सहायक कलाकार प्रभावशाली हैं, लेकिन बहुत मौके नहीं मिले जहाँ वे पूरी तरह चमक सकें।

दर्शकों-सोशल मीडिया क्या कह रहे?

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ मिश्रित हैं। कुछ यूज़र्स ने फिल्म को “इंटेंस लव स्टोरी”, “दर्द-और-जुनून का मिश्रण” कहा है। वास्तव में एक ट्विटर यूज़र ने लिखा:

“एक दीवाने की दीवानियत दिलचस्प, दो मजबूत पिलर-ड्रामा और म्यूजिक पर बनी एक इंटेंस लव स्टोरी. निर्देशक मिलाप जावेरी ने प्यार, दर्द और जुनून को कुशलता से पिरोया है।”

वहीं दूसरों ने इसे पुराने रोमांटिक ड्रामों जैसा कहा है — ओवरड्रामा, धीमी गति और परिचित कहानी-फ्रेम के चलते कुछ निराश भी हुए हैं।

क्या देखी जाए या न देखी जाए?

अगर आप ऐसे प्रेम-कहानी देखने जा रहे हैं जिसमें स्टाइल, संगीत, गजब का गाना-डायलॉग और बड़े भाव हों — तो यह फिल्म आपके लिए है। लेकिन अगर आप आधुनिक, तर्कपूर्ण केमिस्ट्री और नायक-नायिका के बीच सटीक जुड़ाव की उम्मीद ले कर गए हैं, तो थिएटर में जाने से पहले विचार करें।

मजबूत-कमजोर पहलू

मजबूती:

संगीत और गाने फिल्म की जान हैं।

दृश्य-निर्माण, सेट-डिज़ाइन और लोकेशन ने अनुभव बढ़ाया।

प्रमुख कलाकारों का प्रयास प्रशंसनीय।

कमजोरियाँ:

कहानी में नया कुछ नहीं — प्रेम-नफरत-शक्ति-जुनून का पुराना मिश्रण।

कुछ दृश्य ओवर-ड्रामैटिक लगे।

केमिस्ट्री में उतनी गहराई नहीं मिली जितनी अपेक्षित थी।

निष्कर्ष

‘एक दीवाने की दीवानियत’ एक शैलीवार मनोरंजन फिल्म है — ग्लैमरस, धड़कन-भरी और संगीत-प्रधान। यह उन दर्शकों को खुश करेगी, जो पुराने-स्टाइल रोमांस को आज भी सराहते हैं। यदि आप थिएटर में इस तरह की कहानी देखने को तैयार हैं, तो इसे देखें। लेकिन यदि आप नवीनता, लय-बद्ध कहानी और ताज़ा केमिस्ट्री की तलाश में हैं, तो इस फिल्म को मानते हुए देखें कि यह उस मुकाम तक उतनी गहराई नहीं पहुँचती जितनी चाहिये थी।

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