Masti 4 Box Office Crash का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगातार गिर रहा है। चार दिनों में फिल्म सिर्फ ₹10 करोड़ तक पहुंची, जबकि ‘120 बहादुर’ तेज़ी से बढ़त बनाती जा रही है।
Masti 4 Box Office Day 4
विवेक ओबेरॉय रितेश देशमुख की फिल्म ने पार किया ₹10 करोड़ का आंकड़ा लेकिन ‘120 बहादुर’ ने लिया बढ़त। विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफ़ताब शिवदासानी स्टारर Masti 4 और 120 बहादुर दोनों ही फिल्में 21 नवंबर, शुक्रवार को सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज़ हुईं। अलग-अलग जॉनर की इन फिल्मों से उम्मीद थी कि Masti 4 अपनी स्थापित फ्रेंचाइज़ी की वजह से सिंगल स्क्रीन पर बेहतर प्रदर्शन करेगी, जबकि 120 बहादुर मल्टीप्लेक्स दर्शकों को आकर्षित करेगी। लेकिन शुरुआती चार दिनों का बिज़नेस कुछ और ही कहानी बता रहा है।
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120 बहादुर ने दिखाई बेहतर पकड़
बॉक्स ऑफिस ट्रेंड्स के मुताबिक, फ़रहान अख्तर की वॉर ड्रामा 120 बहादुर को दर्शकों से बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म न सिर्फ स्थिर बनी हुई है बल्कि वर्ड-ऑफ़-माउथ के आधार पर Masti 4 को पीछे छोड़ चुकी है। वहीं अजय देवगन की De De Pyaar De अभी भी दोनों नई रिलीज़ से आगे चल रही है और लगातार मजबूत कमाई दर्ज कर रही है।
Masti 4 Box Office Crash: चार दिनों का बिज़नेस
मस्ती 4 ने ओपनिंग डे पर ₹2.75 करोड़ की कमाई की। शनिवार को भी आंकड़ा यही रहा, जबकि रविवार को फिल्म में हल्की बढ़त के साथ ₹3 करोड़ का कलेक्शन दर्ज हुआ। सोमवार को, यानी चौथे दिन, कलेक्शन गिरकर ₹1.50 करोड़ (अर्ली एस्टिमेट्स) रह गया।
इसके साथ फिल्म का कुल चार दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ₹10 करोड़ पर पहुंच गया है।
Masti 4 :Day Wise Box Office Collection
- Day 1 (Friday): ₹2.75 करोड़
- Day 2 (Saturday): ₹2.75 करोड़
- Day 3 (Sunday): ₹3.00 करोड़
- Day 4 (Monday): ₹1.50 करोड़* (Early Estimates)
- Total: ₹10.00 करोड़
Masti 4 की कहानी
कहानी तीन शादीशुदा दोस्तों अमर रितेश , विवेक और आफताब के इर्द-गिर्द घूमती है।
तीनों यूके में एकरस, बोरिंग और हद से ज़्यादा प्रेडिक्टेबल शादीशुदा ज़िंदगी से परेशान हैं। एक दिन उन्हें अपने दोस्त कामराज (अर्शद वारसी) का सीक्रेट पता चलता है उसकी पत्नी (नरगिस फाखरी) हर साल उसे देती है एक Love Visa। मतलब? एक हफ्ते की खुली छूट जो करना है करो।
तीनों दोस्त इस आइडिया को अपनी शादी में लागू कर देते हैं और यहीं से शुरू होता है सीधा-साधा कॉमेडी सर्कस, गलतफहमियाँ, झगड़े, फालतू ड्रामा और बहुत सारा over the top सेक्स-ह्यूमर। फिल्म दूसरा हाफ आते आते पूरी तरह toilet-humour मोड पर चली जाती है और फिर कहानी पीछे मुड़कर नहीं देखती।