dhurandhar movie review in hindi
dhurandhar movie review in hindi पढ़िए – रणवीर सिंह और आदित्य धर की रिकॉर्ड तोड़ स्पाई-थ्रिलर ‘धुरंधर’ की कहानी, एक्टिंग, एक्शन, म्यूज़िक, पॉलिटिक्स और बॉक्स ऑफिस का डिटेल रिव्यू।
Dhurandhar movie review
अगर आप ‘धुरंधर’ देखने की प्लानिंग कर रहे हैं या पहले ही सिनेमाघर में ये फिल्म देख कर आए हैं और अब गूगल पर dhurandhar movie review in hindi टाइप करके सही राय ढूंढ रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काम का है। यहाँ आपको सिर्फ़ ये नहीं बताया जाएगा कि फिल्म अच्छी है या बुरी बल्कि हम फिल्म की कहानी, एक्टिंग, स्क्रीनप्ले, पॉलिटिकल एंगल, एक्शन, म्यूज़िक से लेकर बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस तक हर चीज़ को आराम से, पॉइंट टू पॉइंट समझाएंगे।
आदित्य धर, जो इससे पहले Uri The Surgical Strike और Article 370 जैसी फिल्मों के ज़रिए दमदार नेशनलिस्ट स्पाई यूनिवर्स खड़ा कर चुके हैं इस बार Dhurandhar में हमें पाकिस्तान के कराची के लयारी अंडरवर्ल्ड के बीच ले जाते हैं। फिल्म की नींव RAW के सीक्रेट मिशन भारत-पाक रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट और असली घटनाओं से प्रेरित टकराव पर रखी गई है। यहाँ कहानी पूरी तरह फिक्शन नहीं लगती बल्कि कई जगहों पर रियल लाइफ इन्सिडेंट्स की झलक महसूस होती है।
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dhurandhar movie review in hindi:फिल्म में शामिल मुख्य कलाकार
रणवीर सिंह – हमज़ा के किरदार में जो RAW का एक अंडरकवर एजेंट है और फिल्म की रीढ़ माना जा सकता है।
अक्षय खन्ना – रहमान डकैत लयारी का एक बेहद खतरनाक और ख़ूंख़ार गैंगस्टर जिसकी मौजूदगी फिल्म में लगातार तनाव बनाए रखती है।
आर. माधवन – अजय सन्याल, जिन्हें इंटेलिजेंस जगत का मास्टरमाइंड दिखाया गया है और जिनकी रणनीति मिशन का आधार बनती है।
संजय दत्त – चौधरी असलम एक इम्पल्सिव और तेज़-तर्रार पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी।
अर्जुन रामपाल – मेजर इक़बाल ISI का एक अधिकारीजो कहानी में बड़ा मोड़ लाता है।
सारा अर्जुन – वो जमील जामाली की बेटी का किरदार निभाती हैं और हमज़ा के भावनात्मक पहलू को उजागर करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
म्यूज़िक: शश्वत सचदेव
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और म्यूज़िक शश्वत सचदेव ने तैयार किया है जिनका काम यहां पूरी कहानी के मूड को और ज़्यादा तीखा और प्रभावी बना देता है।
रनटाइम: धुरंधर लगभग 214 मिनट लंबी फिल्म है यानी सवा तीन घंटे से भी ऊपर का सफर। इतनी बड़ी अवधि में कहानी कई लेयर के साथ खुलती है और आपको लंबे मिशन का एहसास कराती है।
सेटिंग:फिल्म का बड़ा हिस्सा कराची के लयारी अंडरवर्ल्ड में सेट है जहाँ अपराध, राजनीति और आतंक की दुनिया एक दूसरे से टकराती दिखती है। इसके साथ ही कहानी भारत-पाक बॉर्डर और दिल्ली की पॉलिटिकल पावर सर्कल्स तक फैली हुई है जिससे फिल्म का स्केल और भी बड़ा महसूस होता है।
कहानी की गहराई: बदले, राजनीति और अंडरवर्ल्ड के जाल में फंसा मिशन
Dhurandhar movie की कहानी ऐसे आगे बढ़ती है जैसे किसी मोटी किताब के पन्ने धीरे-धीरे खुल रहे हों। हर चैप्टर एक नई लेयर जोड़ता है और जैसे-जैसे प्लॉट आगे बढ़ता है फिल्म और भी घनी होती जाती है।
भारत पर हुए कई बड़े आतंकी हमले जैसे IC-814 हाईजैक, 2001 का संसद हमला और 26/11 के बाद इंटेलिजेंस प्रमुख अजय सन्याल (आर. माधवन) को समझ आता है कि अब सिर्फ बचाव करना काफी नहीं है। उन्हें महसूस होता है कि आतंक की जड़ तक पहुँचना होगा, और इसके लिए पाकिस्तान के लयारी अंडरवर्ल्ड में कदम रखना पड़ेगा जहाँ ISI गैंग और स्थानीय नेता मिलकर भारत के खिलाफ़ छाया-युद्ध चलाते हैं।
इस मिशन के लिए सन्याल को एक ऐसा व्यक्ति चाहिए था जो पाकिस्तान की जमीन पर भी आसानी से घुल-मिल जाए, पर दिल में भारत के लिए तपती आग हो। इसी जगह एंट्री होती है हमज़ा (रणवीर सिंह) की एक ऐसा युवा जो गुस्से और निजी दर्द से इतना टूट चुका है कि गलत कदम उठाकर कानून के शिकंजे में आ गया है। लेकिन उसे सज़ा देने के बजाय सन्याल उसे एक नया रास्ता दिखाते हैं एक मिशन जहाँ वह अपने दर्द को ताकत में बदल सके।
हमज़ा को नई पहचान, नया चेहरा और नया मकसद दिया जाता है। पाकिस्तान पहुँचकर वह लयारी के कुख्यात डॉन रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) के गैंग में घुस जाता है। इसी दुनिया के अंदर ISI के मेजर इक़बाल (अर्जुन रामपाल) और पॉलिटिशियन जमील जामाली (राकेश बेदी) मिलकर भारत के खिलाफ़ खतरनाक योजनाएँ तैयार कर रहे होते हैं।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है फिल्म आतंकवाद , गैंगस्टर राजनीति , गुप्त सौदों RAW/ ISI के दिमागी खेल और हमज़ा के भीतर चल रहे भावनात्मक तूफ़ान को एक साथ जोड़कर एक विशाल और जटिल दुनिया बनाती है।
कुल मिलाकर कहानी का ढांचा भले ही एक क्लासिक स्पाई थ्रिलर जैसा है लेकिन इसकी लयारी जैसी सेटिंग डार्क और ग्रिटी टोन और चैप्टर-बेस्ड नैरेशन इसे बाकी फिल्मों से बिल्कुल अलग पहचान देते हैं।
रणवीर सिंह : हमज़ा के रूप में दबी हुई आग का धमाका
फिल्म की पूरी कहानी जिस कंधे पर टिकी है वह हैं रणवीर सिंह। उनका लुक लंबे बाल घनी दाढ़ी चौड़ा शरीर और आंखों में उबलता गुस्सा जैसे ही पर्दे पर दिखाई देता है तुरंत ही दर्शकों को अपनी ओर खींच लेता है। कई दृश्यों में वे कम बोलते हैं लेकिन उनकी आंखों में छिपा दर्द और भीतर की हलचल बिना शब्दों के ही बहुत कुछ कह जाती है।
सोशल मीडिया पर भी दर्शकों की यही प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है कि यह रोल रणवीर के लिए एक तरह का कमबैक मोमेंट है जहाँ उन्होंने अपनी हाई एनर्जी पर्सनालिटी से हटकर एक ऐसा किरदार निभाया है जिसमें गहराई और इमोशनल लेयर ज्यादा है।
हालाँकि फिल्म की लंबी अवधि के कारण कहीं कहीं उनका लगातार गंभीर और चुप रहने वाला अंदाज़ थोड़ा दोहराव जैसा महसूस होता है लेकिन जैसे-जैसे कहानी क्लाइमैक्स की तरफ बढ़ती है रणवीर अपनी परफॉर्मेंस से दोबारा पूरी तरह पकड़ बना लेते हैं।
आर. माधवन : स्ट्रैटेजिक मास्टरमाइंड अजय सन्याल
आर. माधवन का किरदार भारतीय इंटेलिजेंस के उन रणनीतिक दिमागों की याद दिलाता है जो शांत रहकर भी बड़े से बड़ा खेल पलटने की क्षमता रखते हैं। पूरी फिल्म में वह स्थिर सोच समझकर कदम उठाने वाले और बेहद कैलकुलेटेड व्यक्ति का चेहरा बने रहते हैं। उनका काम सिर्फ़ मिशन को लीड करना नहीं बल्कि रणनीति बनाना राजनीतिक माहौल को संभालना और हमज़ा जैसे एसेट्स का सही दिशा में इस्तेमाल करना है उनके सीन पूरी फिल्म के लिए मार्गदर्शक की तरह हैं जिस दिशा में वह संकेत देते हैं कहानी वहीं मुड़ती चली जाती है।
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सपोर्टिंग कास्ट – संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी, सारा अर्जुन
संजय दत्त (चौधरी असलम)
संजय दत्त इस फिल्म में एक पाकिस्तानी पुलिस अफसर के रूप में दिखाई देते हैं जिसकी अपनी निजी दुश्मनियाँ कहानी में एक नई परत जोड़ती हैं। उनका स्टाइल और स्क्रीन उपस्थिति आज भी प्रभाव छोड़ती है लेकिन फिल्म में उनका ट्रैक थोड़ी बिखरी हुई गति से आगे बढ़ता है।
अर्जुन रामपाल (मेजर इक़बाल)
अर्जुन रामपाल ISI ऑफिसर के रूप में सामने आते हैं स्मार्ट योजनाबद्ध और बेहद चालाक। वह सीधे आमने सामने टकराने वाले विलेन नहीं बल्कि पॉलिटिकल और गैंगस्टर नेटवर्क के बीच बैकडोर से खेल को नियंत्रित करने वाले शख्स हैं।
राकेश बेदी (जमील जामाली)
राकेश बेदी इस फिल्म का अप्रत्याशित सरप्राइज़ हैं। जिस अभिनेता को अक्सर हास्य भूमिकाओं में देखा गया है वह यहाँ चालाक मौकापरस्त और चेहरे पर दोहरी बातें छिपाए हुए नेता का किरदार निभाते हुए वाकई चौंकाते हैं।
सारा अर्जुन
सारा अर्जुन की मौजूदगी हमज़ा के जीवन में एक मानवीय कोण जोड़ती है। उनकी वजह से हमज़ा के भीतर के भावनात्मक संघर्ष को और साफ़ देखा जा सकता है। हालांकि रणवीर के इंटेंस कैरेक्टर के सामने इनके रोमांटिक हिस्से का असर थोड़ा हल्का पड़ जाता है।
अक्षय खन्ना – रहमान डकैत के रूप में ठंडी लेकिन खतरनाक मौजूदगी
अगर फिल्म में किसी अभिनेता ने सचमुच कहानी को एक अलग ऊँचाई पर पहुंचाया है तो वह अक्षय खन्ना हैं। उनका लुक तीखी दाढ़ी, बर्फ़ जैसी ठंडी नज़र और हल्की सी मुस्कान ऐसा असर छोड़ता है कि पर्दे पर आते ही दर्शक भीतर से कांप उठते हैं। अक्षय अपनी आवाज़ ऊँची किए बिना सिर्फ़ शांत चेहरे और धीमे संवादों से ऐसा खतरा पैदा करते हैं कि कई जगह लगता है जैसे कहानी का असली केंद्र वही हों। अक्सर मल्टीस्टारर फिल्मों में विलेन भीड़ का हिस्सा बनकर गुम हो जाते हैं लेकिन यहाँ रहमान डकैत का रोल पूरी तरह विकसित दिखता है और दर्शक इसे फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रखते हैं।
214 मिनट का रनटाइम – OTT सीरीज़ जैसा फील आता है। बीच के हिस्से में स्क्रीनप्ले लूज़ हो जाता है।
बहुत सारे किरदार हर स्टार के लिए अलग ट्रैक देने की कोशिश में स्टोरी मेन प्लॉट से भटकती है।कुछ सबप्लॉट्स (जैसे खास रोमांटिक हिस्से, पुलिस-गैंगस्टर इंटरनल पॉलिटिक्स) को थोड़ा छोटा रखा जाता तो फिल्म ज़्यादा क्रिस्प लगती। कुल मिलाकर आदित्य धर ने बहुत बड़ा कैनवास उठा लिया है और उसे संभाल भी लेते हैं लेकिन रास्ते में कहीं-कहीं फिल्म की स्पीड और टाइटनेस से समझौता करना पड़ता है।
विज़ुअल्स और म्यूज़िक: Gangs of Lyari जैसा रॉ फील
जो लोग रॉ, ग्रिटी और हिंसक ट्रीटमेंट के फैन हैं, उनके लिए धुरंधर एक विज़ुअल ट्रीट है।
एक्शन सीन: गली-कूचों में क्लोज क्वार्टर फाइट्स हैंड टू हैंड कॉम्बैट और गन फाइट्स
ब्लास्ट सीक्वेंस और नाइट ऑपरेशन्स कई सीन इतने इंटेंस हैं कि वीक-हार्टेड ऑडियंस के लिए थोड़े ज़्यादा भी लग सकते हैं।
सिनेमैटोग्राफी (विकाश नौवलखा): लयारी की तंग गलियाँ, ग्रे-ब्राउन टोन, बारिश, धुआँ, नीयन लाइट सब मिलकर माहौल बनाते हैं। कुछ वाइड शॉट्स थिएटर में देखकर ही मज़ा देते हैं।
dhuranadhar movie review in hindi:म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर
बैकग्राउंड स्कोर एकदम पल्स ड्रिवन है जहाँ ज़रूरत पड़े वहाँ धड़कन तेज़ कर देता है।
पुराना Rambha Ho और दूसरे रेट्रो ट्रैक्स का इस्तेमाल नॉस्टैल्जिक भी है और सिनेमैटिक भी लेकिन हर किसी को ये चॉइस पसंद आए ये ज़रूरी नहीं।
म्यूज़िक, साउंड डिज़ाइन और एक्शन मिलकर फिल्म को कहीं कहीं ABSOLUTE CINEMA जैसा फील देते हैं जैसा कि कई दर्शक सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं।
पॉलिटिकल एंगल: फिल्म का नजरिया हकीकत की झलक या एक-पक्षीय कहानी?
आदित्य धर की फिल्मों में राजनीति और नेशनल सिक्योरिटी का असर हमेशा साफ दिखाई देता है, और Dhurandhar movie भी उसी लाइन को आगे बढ़ाती है। यह फिल्म बिना किसी घुमाव के दिखाती है कि किस तरह पाकिस्तान की राजनीति, ISI का दखल और वहां के गैंगस्टर नेटवर्क मिलकर भारत के खिलाफ परदे के पीछे युद्ध छेड़े रहते हैं।
इसके साथ ही कहानी यह संकेत भी देती है कि पहले, खासकर 26/11 के बाद, भारत की प्रतिक्रिया उतनी दृढ़ नहीं मानी गई थी। जबकि मौजूदा समय में सरकार की नीति बदल चुकी है और अब रणनीति दुश्मन को उसी की जमीन पर जवाब देने वाली है।
यही वजह है कि दर्शकों की राय भी दो हिस्सों में बंट जाती है: कुछ लोग इसे देश की सुरक्षा स्थिति का वास्तविक और बेबाक चित्रण मानते हैं, जबकि कुछ दर्शकों को लगता है कि फिल्म नेशनलिस्ट विचारधारा का एकतरफा पक्ष ज़्यादा दिखाती है।
dhuranadhar movie review in hindi:किन दर्शकों को dhurandhar film दिल से पसंद आएगी?
अगर आप उन दर्शकों में से हैं जिन्हें पर्दे पर सीक्रेट एजेंसियों का दिमागी खेल, RAW ISI की चालें और बॉर्डर की राजनीति रोमांचित करती है, तो dhurandhar movie आपके लिए बिल्कुल सही फिल्म है। इस कहानी में वही कच्चापन और तीखापन है, जो स्पाई थ्रिलर के असली मज़े को बढ़ाता है।
अगर आपने पहले Uri, Baby, Raazi, Animal या Gangs of Wasseypur जैसी फिल्मों का ट्रीटमेंट पसंद किया है, तो dhurandhar film की दुनिया भी आपको उतनी ही मजबूती से पकड़ लेगी। इसकी ग्रिटी टोन और इंटेंस माहौल आपको लगातार अपने साथ जोड़े रखते हैं।
यह फिल्म उन दर्शकों को भी खूब भाएगी, जिन्हें हिंसा और डार्क कंटेंट से दिक्कत नहीं होती। कई बार किरदारों की क्रूर दुनिया स्क्रीन पर बेहद रॉ लग सकती है, लेकिन यदि आप इसे रियलिस्टिक प्रस्तुति मानकर देखते हैंतो अनुभव और भी प्रभावी हो जाता है।
और हाँ अगर आप रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त या आर. माधवन के प्रशंसक हैंतो उनके दमदार परफॉर्मेंस dhurandhar film को आपके लिए एक पावर पैक्ड ट्रीट बना देंगे।
dhuranadhar movie review in hindi:किसे यह फिल्म उतनी प्रभावी न लगे?
यदि आप उन लोगों में से हैं जिन्हें तीन घंटे से ज्यादा लंबी फिल्में देखना भारी लगता है तो Dhurandhar film का रनटाइम आपको थका सकता है। फिल्म अपनी ही रफ्तार में आगे बढ़ती है इसलिए धैर्य यहाँ ज़रूरी है।
इसके अलावा, अगर आप फिल्मों में बहुत तेज़ राष्ट्रवादी या राजनीतिक टोन पसंद नहीं करते तो यह कहानी आपको थोड़ा एकतरफ़ा महसूस हो सकती है। फिल्म का नैरेटिव जगह जगह पॉलिटिक्स की ओर झुकता दिखाई देता है। साथ ही अगर आपकी पसंद लाइट हार्टेड,फैमिली-फ्रेंडली या पूरी तरह रोमांटिक फिल्में हैं तो Dhurandhar film की हिंसक और गंभीर दुनिया आपकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग हो सकती है।
धुरंधर की खूबियाँ और कमियाँ (Plus & Minus Points)
खूबियाँ
- रणवीर सिंह इस फिल्म में अपनी पारंपरिक हाई एनर्जी इमेज से हटकर एक बेहद संतुलित और इंटेंस परफॉर्मेंस देते हैं। उनका यह बदला हुआ अंदाज़ उन्हें पहले से भी ज्यादा प्रभावशाली बना देता है।
- वहीं दूसरी तरफ अक्षय खन्ना अपनी ठंडी खामोश और डर पैदा करने वाली एक्टिंग से स्क्रीन पर राज करते हैं। रहमान डकैत का उनका रूप फिल्म के सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो जाता है।
- फिल्म का बैकड्रॉप साफ साफ दिखाता है कि कहानी RAW के ऑपरेशन्स लयारी के अंडरवर्ल्ड और राजनीतिक दिमागी खेलों की गहरी रिसर्च पर आधारित है। यह सेटिंग फिल्म को एक असली जमीन से जुड़ा माहौल देती है।
- एक्शन सीक्वेंस, साउंड डिज़ाइन और बैकग्राउंड म्यूज़िक यानी BGM थिएटर के माहौल में और भी दमदार लगते हैं। कई सीन तो सिर्फ आवाज़ और मूवमेंट के कारण ही दिल की धड़कनें तेज़ कर देते हैं।
- कहानी का कैनवास काफी बड़ा है जो स्थानीय राजनीति से लेकर इंटरनेशनल जियोपॉलिटिक्स तक फैला हुआ दिखता है। यही व्यापकता Dhurandhar movie को साधारण थ्रिलर से कहीं आगे ले जाती है।
- और सबसे खास बात फिल्म का क्लाइमैक्स और पोस्ट-क्रेडिट सीन दोनों मिलकर दर्शकों में अगले भाग यानी Part 2 को लेकर जोरदार उत्सुकता छोड़ जाते हैं।
कमियाँ
- फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसका लंबा रनटाइम है। 214 मिनट का समय कई दर्शकों के लिए थोड़ा भारी पड़ सकता है, क्योंकि कहानी बीच-बीच में धीमी भी हो जाती है, जिससे धैर्य की परीक्षा होती है।
- इसके अलावा, फिल्म में बहुत सारे सबप्लॉट और किरदार शामिल किए गए हैं। इतनी सारी लेयर होने की वजह से कभी-कभी मुख्य कहानी का फोकस भटक जाता है और दर्शक को यह समझने में वक्त लगता है कि असली ट्रैक कौन-सा है।
- फिल्म का रोमांटिक हिस्सा भी उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ता। हमज़ा के बेहद इंटेंस और डार्क जोन के सामने यह ट्रैक कमजोर महसूस होता है और कहानी की गति में कोई बड़ा योगदान नहीं दे पाता।
- कुछ दृश्यों में डायलॉग और ट्रीटमेंट इतना जोरदार राष्ट्रवादी या जिंगोस्टिक हो जाता है कि फिल्म का नैरेटिव थोड़ा असंतुलित लगता है। यह उन दर्शकों को खटक सकता है जो बैलेंस्ड टोन की उम्मीद लेकर आए हों।
dhuranadhar movie review in hindi:Rating: धुरंधर को कितने स्टार?
अगर हम फिल्म को कुल मिलाकर बैलेंस करके देखें –
परफॉर्मेंस: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
स्क्रीनप्ले व डायरेक्शन: ⭐⭐⭐☆ (3.5/5)
टेक्निकल (एक्शन, BGM, विज़ुअल्स): ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
रीवॉच वैल्यू: ⭐⭐⭐☆ (3.5/5)
हमारी ओवरऑल रेटिंग:
⭐ 3.5/5 – एक पावरफुल, इंटेंस लेकिन थोड़ी ओवर-लेंथ स्पाई-थ्रिलर
dhuranadhar movie review in hindi:Dhurandhar Movie से जुड़े आम दर्शकों के सवाल
1. Dhurandhar किस टाइप की मूवी है?
‘धुरंधर’ एक स्पाई-एक्शन थ्रिलर फिल्म है। इसमें RAW मिशन, पॉलिटिकल ड्रामा और अंडरवर्ल्ड वाला ग्रिटी माहौल सब कुछ मिल जाता है।
2. Dhurandhar मूवी कितनी लंबी है?
फिल्म करीब 214 मिनट की है। यानी तीन घंटे से ज्यादा काफी लंबी मानी जाएगी।
3. क्या Dhurandhar सच्ची कहानी पर बनी है?
पूरी तरह सच नहीं, लेकिन कहानी को RAW के असली covert ऑपरेशन्स और कराची लयारी के माफिया सिस्टम से इंस्पिरेशन मिली है। इसलिए इसे रियल टच वाली फिक्शन कहा जा सकता है।
4. Dhurandhar में हीरो कौन है?
फिल्म के लीड रणवीर सिंह (हमज़ा) हैं, लेकिन अक्षय खन्ना, आर. माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल भी बड़े और दमदार रोल में हैं।
5. क्या Dhurandhar फैमिली के साथ देख सकते हैं?
छोटे बच्चों के साथ देखना सही नहीं है, क्योंकि इसमें हिंसा, गाली-गलौज और काफी इंटेंस सीन हैं।
6. Dhurandhar की फर्स्ट डे बॉक्स ऑफिस कमाई कितनी रही?
पहले दिन फिल्म ने करीब ₹27 करोड़ कमाए, जो रणवीर सिंह की सबसे बड़ी ओपनिंग मानी जा रही है।
7. क्या Dhurandhar रणवीर सिंह की कमबैक फिल्म है?
हाँ, कई दर्शक और रिव्यूअर इसे रणवीर का स्ट्रॉन्ग कमबैक मानते हैं। यहाँ उन्होंने अपनी एनर्जी को कंट्रोल में रखते हुए गहरी एक्टिंग की है।
8. क्या Dhurandhar का Part 2 भी आएगा?
फिल्म का क्लाइमैक्स और पोस्ट-क्रेडिट सीन साफ दिखाता है कि Operation Dhurandhar Part 2 की तैयारी पहले से ही सेट है।
9. Dhurandhar किस तरह के लोगों को अच्छी लगेगी?
अगर आपको RAW–ISI स्टोरी, इंडिया–पाक टेंशन अंडरवर्ल्ड थीम हिंसक और ग्रिटी एक्शन वाली फिल्में पसंद हैं, तो ये मूवी आपके लिए ही है।
10. Dhurandhar का म्यूज़िक कैसा है? याद रहता है क्या?
फिल्म का BGM बहुत स्ट्रॉन्ग है। खासकर कुछ रेट्रो गाने थिएटर में अच्छा असर छोड़ते हैं। हालांकि यह ऐसी फिल्म नहीं है जिसमें चार्टबस्टर सॉन्ग हों।
11. क्या Dhurandhar सिर्फ़ पॉलिटिकल प्रोपेगैंडा है?
पूरी तरह नहीं। फिल्म में नेशनलिस्ट टोन जरूर है, लेकिन इसे थ्रिलर और एंटरटेनमेंट के तौर पर भी बनाया गया है। आप इसे दोनों नजरिए से देख सकते हैं।
12. Dhurandhar Movie Review in Hindi कहाँ मिलेगा?
आप अभी जो आर्टिकल पढ़ रहे हैं, वही एक डिटेल्ड dhurandhar movie review in hindi है कहानी, एक्टिंग, टेक्निकल, पॉलिटिक्स से लेकर बॉक्स ऑफिस तक सब समझाया गया है।